मुक्तक

तुमको देखकर मेरा दिल मचलता है!
तुमको सोचकर मेरा दिल बहलता है!
कैसे मैं लगाऊँ जख्मों पर बंदिशें?
मुझको गमें-ख्याल दिन रात कुचलता है!

मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

Comments

3 responses to “मुक्तक”

  1. दीपक पनेरू Avatar
    दीपक पनेरू

    nice

  2. राम नरेशपुरवाला

    Good

  3. Abhishek kumar

    Gajab

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