मुक्तक

देखा है दुनिया को अपनी दिशा बदलते
अपने लोगो को अपनो से आंखे फ़ेरते
कतरा कतरा जिंदगी का रेत फिसलता जाता है
देखा है जिंदगी को मौत में बदलते

Comments

2 responses to “मुक्तक”

  1. Abhishek kumar

    Good

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