मुक्तक

कुल्हड़ कि चुस्की कुछ याद दिलाती हैं,
दोस्त कि दोस्ती साथ निभाती हैं,
महक मिट्टी कि वतन पर प्यार लुटाती हैं,
चाय कि चुस्की बचपन जवानी कि कहानी सुनाती हैं,

महेश गुप्ता जौनपुरी

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