छप्पन भोग लगा कर बेटा आज नदी के पास बैठा है
पिण्ड बनाकर मेवे का ढोंग देखो रचा कर बैठा है
जो मर गये एक निवाले के लिए घुट-घुट कर चार दिवारी में
क्या क्या ना सुना बुढ़ापे में बाप ने बुढ़ापे की लाचारी में
मुक्तक

Comments
8 responses to “मुक्तक”
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बहुत सही
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Very nice
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Nice
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बहुत खूब सर
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Sahi kaha
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सही बात
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Nice
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Wah
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