मुक्तक

छप्पन भोग लगा कर बेटा आज नदी के पास बैठा है
पिण्ड बनाकर मेवे का ढोंग देखो रचा कर बैठा है
जो मर गये एक निवाले के लिए घुट-घुट कर चार दिवारी में
क्या क्या ना सुना बुढ़ापे में बाप ने बुढ़ापे की लाचारी में

Comments

8 responses to “मुक्तक”

  1. Mohit Sharma Avatar

    बहुत खूब सर

  2. राम नरेशपुरवाला

    Wah

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