मुक्तक

नहीं आँचल कभी खिसकने दी
वो अपने माथ से।
आज देख रहे हैं सब उसको
होकर यूं अनाथ से।।

Comments

7 responses to “मुक्तक”

  1. Geeta kumari

    बहुत ख़ूब..

  2. मार्मिक पंक्तियां

  3. Suman Kumari

    सुन्दर

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  5. मोहन सिंह मानुष Avatar

    करुणादायी व मार्मिक

  6. मार्मिक पंक्तियाँ

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