नहीं आँचल कभी खिसकने दी
वो अपने माथ से।
आज देख रहे हैं सब उसको
होकर यूं अनाथ से।।
मुक्तक
Comments
7 responses to “मुक्तक”
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बहुत ख़ूब..
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मार्मिक पंक्तियां
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सुन्दर
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करुणादायी व मार्मिक
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मार्मिक पंक्तियाँ
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👌
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