चुप रहते है तो अंजान समझ लेते है
बोल देते है तो नादान समझ लेते है |
बात न माने तो कहते है मानता ही नही
मान लेते है तो फरमान समझ लेते है ||
अगर हम तोड दें छोटे से काँच के टुकडे
नासाज हो उसे आसमान समझ लेते है |
पकड लेते है जब कंधा कभी समझाने को
ओ इत्तेफाक से गिरेबान समझ लेते है ||
उपाध्याय…
मुक्तक
Comments
2 responses to “मुक्तक”
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behtareen
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Wah
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