मुक्तक

ये आँखे मेरी निर्झर जैसे झर जाती तो अच्छा होता
जिग्यासा दर्शन की मन में मर जाती तो अच्छा होता |
तुम पथिक मेरे पथ के ही नही तुम दूजे पथगामी हो
मेरे पागल मन से यह प्रीत उतर जाती तो अच्छा होता ||
उपाध्याय…

Comments

2 responses to “मुक्तक”

  1. Kalki Desai Avatar
    Kalki Desai

    lajabaab

  2. राम नरेशपुरवाला

    Nice

Leave a Reply

New Report

Close