मुक्तक

लोगों की बातों में आकर मुझको ना तुम निराश करो
मैं प्रणय निवेदन करता हूँ बस इतनी पूरी आश करो |
वे भी उन्मादी प्रेम रथी पर में पर वंचन करते है
सो हृदयंगम कर प्रीत मेरी मत इसका उपहास करो ||
उपाध्याय…

Comments

2 responses to “मुक्तक”

  1. Sridhar Avatar
    Sridhar

    Uttam …

  2. राम नरेशपुरवाला

    उत्तम

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