लोगों की बातों में आकर मुझको ना तुम निराश करो
मैं प्रणय निवेदन करता हूँ बस इतनी पूरी आश करो |
वे भी उन्मादी प्रेम रथी पर में पर वंचन करते है
सो हृदयंगम कर प्रीत मेरी मत इसका उपहास करो ||
उपाध्याय…
मुक्तक
Comments
2 responses to “मुक्तक”
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Uttam …
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उत्तम
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