मुखौटा

सब मुखौटा है लगाए फिर रहे
और सच को सब छिपाए फिर रहे

एक वो है कुछ बताता ही नही
एक हम है सब बताए फिर रहे

लोग पैसो के लिये है बावले
और रिश्तो को भुलाए फिर रहे

कामयाबी से मेरी हैरान सब
दांतो में उगंली दबाए फिर रहे

मर मिटेगें एक दिन दिल में लिये
दर्द जो दिल में दबाए फिर रहे

हाल वो ही पूँछते है अब लकी
देख लो जिनके सताए फिर रहे

Comments

71 responses to “मुखौटा”

  1. 198126947436688 Avatar

    बहुत शानदार गजल……!

  2. Gaurav Avatar

    बहुत सुंदर

  3. ompoonia24 Avatar

    बहुत ही खूबसूरत

  4. Gaurav Avatar

    बेहद लाजवाब

  5. 198126947436688 Avatar

    Bah sandar +jandar jandar ghazal…..

  6. Akhtar Gorakhpuri Avatar

    बहुत उम्दा बहुत खूब

  7. MK Avatar

    बेहतरीन, उम्दा गजल

  8. Babita Avatar

    Very very nice keep it writing such goood piece of art

  9. Reena Avatar

    Nice work,keep it up

  10. Drsp Avatar

    कविता आज की सच्चाई बखूबी बयान कर रही है…..

  11. Mukesh Avatar

    बेहतरीन,उम्दा

  12. Ramesh Avatar

    बहुत उम्दा , मर्म को छूने वाली

  13. Shripal Avatar

    Bahut khoob Lucky Bhai.

    1. Dharmendra Kumar Avatar

      मैनेजर साब धन्यवाद

  14. Pradeep Avatar

    बहुत सुंदर रचना वाह

  15. Deepak Avatar

    Kya bat, kya bat, kya bat??

  16. Aakash Avatar

    very close to life…. amazing lines Best wishes

  17. 1037576473076056 Avatar

    वाह…लकी जी ..बहुत खूबसूरत रचना ..बेहद उम्दा …????

  18. Rahuol Avatar

    बहुत सुंदर रचना। बधाई बहुत बहुत…

  19. narendray104 Avatar

    वाह वाह वाह … जिंदाबाद … शानदार ????

  20. Abhishek kumar

    Awesome

Leave a Reply

New Report

Close