Author: Lucky

  • परिन्दा कैद से छूटा नही है

    परिन्दा कैद से छूटा नही है
    छुडाने कोई भी आता नही है

    बहुत खामोश है दरिया के जैसे
    बहुत बेचैन है कहता नही है

    दिवाना बन गया है प्यार में वो
    वो लड़ता है मगर वैसा नही है

    बनाया है उसे पागल जिन्होनें
    वही अब कह रहे अच्छा नही है

    सभी लड़ रहा है ठीक है पर
    कोई कहदे कि वो ऐसा नही है

    नसीहत वक्त ने क्या खूब दी है
    करो वो काम जो दिखता नही है

  • Ghazal

    मुहँ लटकाए आख़िर तू क्यो बैठा है
    इस दुनिया में जो कुछ भी है पैसा है

    दुख देता है घर में बेटी का होना
    चोर -उचक्का हो लड़का पर अच्छा है

    कुछ भी हो औरत की दुश्मन है औरत
    सच तो सच है बेशक थोड़ा कड़वा है

    सबकी हसरत अच्छे घर जाए बेटी
    लड़का कितना महगां हो पर चलता है

    शादी क्या है सौदा है जी चीज़ो का
    खर्च करेगा ज्यादा वो ही बिकता है

    लुटने वालो को लूटे तो क्या शिकवा
    आज लकी मै भी लूटूँ तो कैसा है

  • Ghazal

    मुहँ लटकाए आख़िर तू क्यो बैठा है
    इस दुनिया में जो कुछ भी है पैसा है

    दुख देता है घर में बेटी का होना
    चोर -उचक्का हो लड़का पर अच्छा है

    कुछ भी हो औरत की दुश्मन है औरत
    सच तो सच है बेशक थोड़ा कड़वा है

    सबकी हसरत अच्छे घर जाए बेटी
    लड़का कितना महगां हो पर चलता है

    शादी क्या है सौदा है जी चीज़ो का
    खर्च करेगा ज्यादा वो ही बिकता है

    लुटने वालो को लूटे तो क्या शिकवा
    आज लकी मै भी लूटूँ तो कैसा है

  • माँ की दुआ

    माँ हो साथ मेरे तो दुआ भी साथ देती है
    जब तक हाथ सर पे है खता भी साथ देती है

    जाने क्या असर है माँ के हाथो में खुदा जाने
    ममता से खिला दे तो दवा भी साथ देती है

    कुछ भी हो नही सकता भले तूफान हर सू हो
    माँ जब सामने हो तो हवा भी साथ देती है

    फैलेगीं हवाओं में बहारें इस कदर तेरे
    माँ के साथ होने से फ़िजा भी साथ देती है

    रहमत जान ले तू भी ‘लकी’ माँ की दुआओं की
    सर पे हाथ रखते ही कजा भी साथ देती है

  • मुखौटा

    सब मुखौटा है लगाए फिर रहे
    और सच को सब छिपाए फिर रहे

    एक वो है कुछ बताता ही नही
    एक हम है सब बताए फिर रहे

    लोग पैसो के लिये है बावले
    और रिश्तो को भुलाए फिर रहे

    कामयाबी से मेरी हैरान सब
    दांतो में उगंली दबाए फिर रहे

    मर मिटेगें एक दिन दिल में लिये
    दर्द जो दिल में दबाए फिर रहे

    हाल वो ही पूँछते है अब लकी
    देख लो जिनके सताए फिर रहे

  • वतन

    मेरी ग़ज़ल ” वतन” को पढे मेरी प्रोफाईल पर ।और कमेन्ट जरूर करे आपका लकी

    वतन

  • वतन

    वतन पे है नजर जिसकी बुरी उसको मिटा देगें,,,
    सबक ऐसा सिखा देगें कि धड से सर उडा देगें।।

    जहाँ पानी बहाना है वहां पर खून देगें हम,,,
    वतन से प्यार कितना है जहाँ को हम दिखा देगें।।

    हजारो साल काटे हैं गुलामों की तरह हमने,,,
    नहीं अब और सहना हैं ये दुनिया को बता देगें।।

    कसम है उन शहीदों की लुटा दी जान सरहद पे,,,
    उसी रस्ते चलेंगे और अपना सर कटा देगें।।

    हमारे गाँव का बच्चा नहीं है कम किसी से भी,,,
    जहाँ भी पावं रख देगें वहां धरती हिला देगें।।

    समन्दर कांप जाएगा ये दरिया सूख जाएगा,,,
    कि ऐसी आग भर देगें सभी मुर्दे जगा देगें।।

    मेरा हर शब्द अगांरा मेरा हर लफ्ज़ है बिजली,,,
    जहाँ दुश्मन दिखा हमको ‘लकी’ उसको जला देगें।।

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