मुख खोलो

मुख खोलो कुछ बचन कहो
इसमें क्या कोई घाटा है।
रौनक क्योंकर खोई -सी है
आज पटल पर सन्नाटा है।।

Comments

3 responses to “मुख खोलो”

  1. बहुत ख़ूब

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