न है उन्वान न ही हाशिया है मुझे सुन लो सरापा दास्तां हूँ

10 Comments

  1. मुझको मिले हैं ज़ख्म जो बेहिस जहान से
    फ़ुरसत में आज गिन रहा हूँ इत्मिनान से….bahut ache janaab!

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