मुझको मिले हैं ज़ख्म जो बेहिस जहान से

मुझको मिले हैं ज़ख्म जो बेहिस जहान से

फ़ुरसत में आज गिन रहा हूँ इत्मिनान से

आँगन तेरी आँखों का, न हो जाये कहीं तर

डरता हूँ इसलिए मैं वफ़ा के बयान से

साहिल पे कुछ भी न था तेरी याद के सिवा

दरिया भी थम चुका था अश्क़ का उफ़ान से

नज़रों से मेरी नज़रें मिलाता है हर घड़ी

इकरार-ए-इश्क़ पर नहीं करता ज़ुबान से

कटती है ज़िन्दगी नदीश की कुछ इस तरह

हर लम्हाँ गुज़रता है नये इम्तिहान से

©® लोकेश नदीश

Comments

10 responses to “मुझको मिले हैं ज़ख्म जो बेहिस जहान से”

  1. Ankit Bhadouria Avatar
    Ankit Bhadouria

    bht khoob

    1. Lokesh Nashine Avatar
      Lokesh Nashine

      शुक्रिया

      1. Ankit Bhadouria Avatar
        Ankit Bhadouria

        🙂

  2. Panna Avatar

    मुझको मिले हैं ज़ख्म जो बेहिस जहान से
    फ़ुरसत में आज गिन रहा हूँ इत्मिनान से….bahut ache janaab!

    1. Lokesh Nashine Avatar
      Lokesh Nashine

      शुक्रिया

  3. Ajay Nawal Avatar
    Ajay Nawal

    Kya kahe…kya alfaaz he…kya zajbaat he…very nice 🙂

    1. Lokesh Nashine Avatar
      Lokesh Nashine

      शुक्रिया

    1. Lokesh Nashine Avatar
      Lokesh Nashine

      शुक्रिया

  4. Abhishek kumar

    😃

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