मुझे मंजूर नहीं है
१६ जुलाई २०१८
जग में अपने अस्तित्व को लेकर मैं हैरान हूँ
इस जीवन का उद्देश्य क्या है, मैं अनजान हूँ
आखिर मेरा जन्म हुआ क्यों है मैं परेशान हूँ
तेरा यूं खामोश बने रहना मुझे मंजूर नहीं है
तेरी मर्जी तेरी इच्छा, तूने चाहा, जन्म दिया
तेरी मनमानी, जब तू चाहेगा उठवा भी लेगा
ये जिंदगी तेरी चाहत है, पर मेरी मजबूरी है
निरुद्देश्य ज़िंदगी बिताना, मुझे मंजूर नहीं है
तुझसे साक्षात्कार को हम भी बहुत तरसते हैं
लेकिन मेरे नयन, मेरी पहचान को बरसते हैं
आखिर इस अंधियारे में दीप कब जलाओगे
तेरा यूं आजमाते रहना, मुझको मंजूर नहीं है
मेरा मैं मुझे धिक्कारता है, जवाब मांगता है
मुझसे मेरे कर्मों का, सारा हिसाब मांगता है
एक ज़िंदगी में कई जीने की तमन्ना नहीं है
पर ये अधूरी सी ज़िंदगी, मुझे मंजूर नहीं है
जरूरी है ये जानना, जीवन का उद्देश्य क्या है
अपने निशान छोड़े बिना, मरना मंजूर नहीं है
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