बोलियां बतिया तेरी ,
काजल भरी
गहरी काली अखियां तेरी।
दिल को चकमक सा कर गई,
भीनी मुस्कुराहटें भर गई,
मनमोहिनी ,चितचोरनी
जादू भरी तेरी हंसी,
मुझमें से मुझको खींच ले गई
मैं अवाक सा संवेदनहीन
शून्य की तरह तुम्हें ताकता रह गया।
तुमने जाते-जाते पलट कर
जो आंखों से वार किया
एक खंजर दिल के आर -पार किया।
मैं मूरत बना
तेरी सूरत निहारता रह गया।
तुम चली गई
मैं पत्थर सा खड़ा रह गया।
निमिषा सिंघल
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