मुन्तजिर है तेरा

हो सके तो फिर कभी लौट कर आना

पलकें बिछाये आज भी मुन्तजिर है तेरा।

Comments

3 responses to “मुन्तजिर है तेरा”

  1. राम नरेशपुरवाला

    Good

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