मुहब्बत

मुहब्बत इस जिंदगी की
खूबसूरती है,
बिना मुहब्बत के
सब कुछ शून्य सा ही है।
मुहब्बत जीने का जरिया है
मुहब्बत निर्मल सी दरिया है
मुहब्बत जीवन भवन स्तम्भ की
मजबूत सरिया है।

Comments

11 responses to “मुहब्बत”

  1. Geeta kumari

    वाह सर, जीने का जरिया, निर्मल सा दरिया…सुंदर शब्दों का चयन और लय बद्ध शैली आपके काव्य की विशेषता रही है । उपमा अलंकार से सुसज्जित बहुत ही सुन्दर कविता है सतीश जी ।कवि की लेखन शैली को अभिवादन ।

    1. सादर धन्यवाद गीता जी, आपकी समीक्षा शक्ति अदभुत है। सादर अभिवादन

      1. Geeta kumari

        🙏🙏

    1. Satish Pandey

      Thank you

  2. मुहब्बत जीने का जरिया है
    वाह वाह पाण्डेय जी

    1. Satish Pandey

      बहुत बहुत धन्यवाद

  3. MS Lohaghat

    सच्ची बात है

    1. Satish Pandey

      धन्यवाद

  4. Piyush Joshi

    बहुत खूब

    1. Satish Pandey

      बहुत बहुत धन्यवाद

Leave a Reply

New Report

Close