वो मेरी आहट से ही मुझको पहचान लेता था,
नींदों में भी बस मेरा ही नाम लेता था।
याद करती थी मैं उससे रात-दिन और वह हिचकियां लेता था।
ना मिलने की कभी जिद्द की उसने, बस रूह से चाहता था और दिल से प्यार करता था।
मेरी सांस उसकी मौजूदगी का एहसास कराती थी
वह मेरे आंसुओं को अमृत की तरह पीता था।
बाकी तो सब मजे लेते हैं,
मेरा पहला प्यार ही था जो मुझसे प्यार करता था।
ना कभी लड़ता था, ना कभी दिल दुखाता था ,
भरोसा उसको मुझ पर भगवान से भी ज्यादा था।
कभी देखा नहीं था उसने मुझे,
मेरी तस्वीर की ही पूजा किया करता था।
मैं रूठ जाती थी वो मनाता था
मेरे सिवा किसी और को ना चाहता था।
वैलेंटाइन” हो या होली”हो,
मेरे फोन का इंतजार किया करता था।
नाम कभी ना लेता था मेरा,
बस मेरी जान,जान कहता था..
मैं जानती हूं वो आज भी मुझको प्यार करता है , मेरी याद में तड़पता है,
जब कभी हिचकी मुझको आती है ! मैं समझ जाती हूं वो याद करता है।।
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