मेरी अभिलाषा

बच्चों को पढ़ाती हूं
जो कुछ सीखा अपने गुरु से,
उनको भी सिखाती हूं
कामयाब हो भारत के बच्चे,
निश-दिन करती हूं जतन
अच्छी शिक्षा सीखें बच्चे,
संपन्न हो मेरा वतन
यही सोच है यही अभिलाषा,
मेहनत करती हूं लेकर यह आशा

*****✍️गीता

Comments

6 responses to “मेरी अभिलाषा”

  1. बहुत सराहनीय और अच्छी सोंच को प्रदर्शित करती हुई आपकी प्रेरक रचना

    1. बहुत-बहुत धन्यवाद प्रज्ञा जी

    1. Geeta kumari

      🙏🙏 बहुत बहुत धन्यवाद ऋषि जी

    1. सादर धन्यवाद भाई जी आभार🙏

Leave a Reply

New Report

Close