मेरी ज़िन्दगी में…..

जब अपनी ख़ामोशियों में,
सुनती हूँ आपकी ख़ामोशियाँ
सुकून के कुछ पल,
महसूस करती हूँ यहाँ l
सोचती रहती हूँ मैं यदा-कदा,
मेरी ज़िन्दगी में आप न आते तो क्या होता….
बेचैन सी इस ज़िन्दगी में…
आप हो दर्द की दवा,
आप हो ग़म की दुआ
आपसे कुछ मन की कहकर,
चैन पाती हैं मेरी बेचैनियाँ l
जब भी अपनी ख़ामोशियों में,
सुनती हूँ आपकी ख़ामोशियाँ॥
_______✍गीता

Comments

8 responses to “मेरी ज़िन्दगी में…..”

  1. Praduman Amit

    बहुत ही आकर्षित कविता है।

    1. समीक्षा के लिए धन्यवाद सर

  2. Rajeev Ranjan Avatar
    Rajeev Ranjan

    हकीकत बयां करती सुंदर प्रस्तुति।
    चरेवेति चरेवेति…..@#₹

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद राजीव सर

  3. Satish Chandra Pandey

    सोचती रहती हूँ मैं यदा-कदा,
    मेरी ज़िन्दगी में आप न आते तो क्या होता…
    बहुत ही लाजवाब पंक्तियाँ, अति उत्तम सृजन गीता जी। ऐसे ही निरन्तर लिखते रहिये।

    1. Geeta kumari

      इस अमूल्य समीक्षात्मक टिप्पणी के लिए और उत्साह वर्धन हेतु आपका हार्दिक धन्यवाद सतीश जी, अभिनन्दन सर

  4. बहुत उत्तम

    1. Geeta kumari

      आभार चन्द्रा जी

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