मेरे ख्वाब ही शायद ठीक है

मेरे ख्वाब ही शायद ठीक है

और ना जगा

खुदगर्ज़ इस दुनिया की फिदरत देखो

सोचा कभी बदलेंगे दुनिया

पर हर घड़ी यह बदलता है

अपनों से दूर किए जाता है।

Comments

6 responses to “मेरे ख्वाब ही शायद ठीक है”

  1. बहुत खूब, बहुत खूब

  2. सुन्दर भाव

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