मेरे राम फिर से आओ ना

मेरे राम!
फिर से आओ
मेरे राम!
फिर से आओ ना,
बढ़ चुकी दानवों की
फौज फिर से,
आओ धरती में
चले आओ ना।
पहले दिखता था रावण
मारना आसान था,
अब तो लगता है वह
मस्तिष्क भीतर घुस गया है।
करोंड़ों दिमाग
दूषित कर चुका है।
लूट कर अस्मतें
शराफत की,
दिखावटी शरीफ
बन चुका है।
लूट लेता है
जब मिले मौका
हर तरफ धोखा ही धोखा,
आदमी आदमी से कटने लगा,
सत्य की राह का राही
भी आज थकने लगा।
आदमी राक्षस बना है यह
निरीह बेटियों को मार रहा,
चूर अपने घमंड में होकर
फिर दुराचार आज करने लगा
सैकड़ों मुख लगा के रावण वह
पाप करने लगा है, हंसने लगा।
मेरे राम अब तो आओ,
आओ ना,
धरा में दानव है
उसे मिटाओ ना,
मेरे राम फिर से आओ ना।

Comments

5 responses to “मेरे राम फिर से आओ ना”

  1. बहुत खूब, अतिसुन्दर

  2. वाह वाह, जबरदस्त कविताएं हो रही हैं।

  3. Geeta kumari

    वाह सर, बहुत ही सुन्दर और संजीदा रचना ।आजकल के माहौल का यथार्थ चित्रण प्रस्तुत करती हुई बहुत ही शानदार रचना है। अति उत्तम लेखन

Leave a Reply

New Report

Close