मैंने तुम्हें जिताया

मैंने तुम्हें जिताया ,
उम्मीद का बटन दबाकर,
सोचा था कि बढ़ाओगे रोजगार को मेरे,
मगर तुमने बढ़ाया,
सिर्फ अपना पेट।

Comments

10 responses to “मैंने तुम्हें जिताया”

  1. Praduman Amit

    उम्मीद के बटन (शब्द बहुत ही सुन्दर है) रचना लाजवाब है।

    1. बहुत बहुत आभार सर

    1. धन्यवाद मैम

  2. मोहन सिंह मानुष Avatar

    वर्तमान में सभी राजनैतिक पार्टियों पर बहुत अच्छा व्यंग
    बहुत सुंदर

    1. बहुत बहुत धन्यवाद सर

    1. बहुत बहुत आभार सर

  3. बिल्कुल सही बात

  4. प्रतिमा

    शुक्रिया

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