मैंने तुम्हें जिताया ,
उम्मीद का बटन दबाकर,
सोचा था कि बढ़ाओगे रोजगार को मेरे,
मगर तुमने बढ़ाया,
सिर्फ अपना पेट।
मैंने तुम्हें जिताया
Comments
10 responses to “मैंने तुम्हें जिताया”
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उम्मीद के बटन (शब्द बहुत ही सुन्दर है) रचना लाजवाब है।
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बहुत बहुत आभार सर
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सुन्दर
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धन्यवाद मैम
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वर्तमान में सभी राजनैतिक पार्टियों पर बहुत अच्छा व्यंग
बहुत सुंदर-

बहुत बहुत धन्यवाद सर
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सुंदर
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बहुत बहुत आभार सर
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बिल्कुल सही बात
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शुक्रिया
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