मैंने देखा है ,शैतान ! इंसानों में

दानव तो है, यूं ही बदनाम
ग्रंथ-पुराणों में ,
मैंने देखा है,शैतान! इंसानों में।

रूह कांप जाए; हृदय फट जाए,
हैवानियत की हदें पैर फैलाए‌।
शर्मसार होती है मानवता ;
सुर्ख़ियों के गलियारों में,
मैंने देखा है, शैतान! इंसानों में।

वो कोमल सी,
नन्ही पंखुड़ी जैसी,
करहाहट ; उसकी पपीहे जैसी,
पर; नोचता रहा ,उसे वो हैवान!
बहता खून; उसके शोषण की कहानी थी ।
फिर भी बच जाते , ऐसे खूंखार!
सत्ता ,कानून के दलालों से,
मैंने देखा है, शैतान! इंसानों में।

—-मोहन सिंह मानुष

Comments

11 responses to “मैंने देखा है ,शैतान ! इंसानों में”

  1. Renu Thapar Avatar

    सुंदर रचना

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar

      बहुत बहुत हार्दिक धन्यवाद 🙏

  2. Geeta kumari

    मार्मिक रचना। बहुत ही भावुक

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar

      हार्दिक अभिनन्दन 🙏

  3. बहुत कुछ कह दिया है आप ने

  4. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    सादर अभिनन्दन , भावों को प्रोत्साहन देने के लिए 🙏

  5. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    बहुत हीं मार्मिक चित्रण

  6. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    बहुत बहुत आभार सर 🙏

  7. सुन्दर रचना

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      सादर धन्यवाद 🙏

  8. Pratima chaudhary

    शानदार

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