मैं लिखता हूँ रात भर कविता
तू सुबह पढ़ कर खुश होती है।
मैं जब कभी हँसता हूँ खुशियों में
मुझे तू हँसता देख कर रोती है।
मैं लिखता हूँ रात भर
Comments
5 responses to “मैं लिखता हूँ रात भर”
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Kya baat hai
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Thanks
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Khoob
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Thank u
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बढ़िया
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