1.) क्या मैं सिर्फ ‘मैं’ नहीं रह सकता? दूसरों के लिए मरते-मरते जीना, मैं नहीं सह सकता।
अपने ख्याल, अपने वसूल क्यों मुझ पर लाद देते हो तुम क्या देख नहीं सकते, जिंदगी भुनती चली जा रही है मेरी?
2.) मुझे साँस लेना आता हैं, जीना मुझे मत सिखाओं, मैं जैसा हूँ, वैसा ही हूँ, बदलना मुझे मत सिखाओ।
बहुत कोशिश की मैंने, खुद को काबिल बनाने की, क्या रह गया हैं आज? सब कुछ खो बैठा हूँ, तुम्हारे नज़रिए से देखने पर ।
3.) खुश रहना सीखा नहीं पाए, तुमने सिर्फ लड़ते रहना सिखाया।
अब किससे लहूँ मैं आज, मेरे सामने खड़ी हैं मेरी ही काया ।
4.) क्या अब खुश हो ? हाँ, हो गया मैं कामयाब !
मन के संवेदनशिलता को त्याग कर, जी रहा हूँ मैं तुम्हारा ख्वाब ।
5.) जैसे झूठी हँसी हँसता हूँ मैं, वैसे ही सच्ची रूलाई छुपाता हूँ।
काश, मैं ‘मैं’ ही बना रहता, अब अपने-आप पर ही तरसता हूँ
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