मुखौटे से भरे हुए मैंखाने हैं….
किस पे भरोसा करें यहां तो अपने ही बेगाने हैं।
मैखाने
Comments
5 responses to “मैखाने”
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भरोसा कभी बैगानों पर कर के देखिये
दिल तो अपने ही तोड़ा करते हैं-

मैं भरोसा कर भी लू अगर उस अजनबी पर तो,
क्या पता बेगाने मुखौटे में कोई अपना ही खंजर लिए बैठा हो,
. . . . .. D…
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Very good👍
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सुंदर
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👏👏👏
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