मोर का नाचना

बादलों को देख मोर झूम-झूम नाचता।
मोरनी है साथ फिर व्योम क्यों निहारता।।
बादलों की चाह में
मोरनी के प्यार में,
या फिर नयनश्रवा के हार में
पंख को पसारना।
बादलों को देख मोर झूम-झूम नाचता।

Comments

2 responses to “मोर का नाचना”

  1. nitu kandera

    Good

Leave a Reply

New Report

Close