बादलों को देख मोर झूम-झूम नाचता।
मोरनी है साथ फिर व्योम क्यों निहारता।।
बादलों की चाह में
मोरनी के प्यार में,
या फिर नयनश्रवा के हार में
पंख को पसारता।
बादलों को देख मोर झूम-झूम नाचता।
मोर का नाचना
Comments
5 responses to “मोर का नाचना”
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Nice
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Kya kehna
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वाह
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Good
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उम्म्दा
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