“मोहब्बत की सजा”

जी रही हूँ..ज़िन्दगी का बोझ उठा रहीं हूँ_

मोहब्बत की सज़ा बो गये हो तुम मैं गुनाहों की फसल काट रही हूँ_

-PRAGYA-

Comments

2 responses to ““मोहब्बत की सजा””

  1. राम नरेशपुरवाला

    सुन्दर

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