मोहब्बत

मोहब्बत ऐ इम्तेहान की इंतहा तो तब हुई,
जब दिन में भी उसके ख्वाबों से बाहर न आ सके हम।।
राही (अंजाना)

Comments

2 responses to “मोहब्बत”

  1. राम नरेशपुरवाला

    Good

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