यदि जड़ें ऊपर हो
और तने नीचे
तो न जड़ें गहराई पा सकती हैं
और न तने का ही विकास होता है
यदि जहां खिड़की होनी चाहिए
वहां दरवाजे हों
जब शांत वातावरण की चाहत हो
तब बज रहे बाजे हों
ऐसे में न शुद्ध हवा होती है
और न ही पर्याप्त प्रकाश होता है
यदि जहां खेत खलिहान होने चाहिए
वहां कंक्रीट का जंगल हो
जहां कानून ,व्यवस्था का राज्य होना चाहिए
वहां अव्यवस्था का दंगल हो
ऐसे में न सब के लिए रोटी होती है
और न ही कोई मुल्क सच में आज़ाद होता है
जब सघनता की जगह विरलता हो
गंभीरता की जगह चपलता हो
जब नज़रे ही बुरी हो लोगों की
जब जेबें भरी हो चोरों की
तब क्या अंतर पड़ता है कपड़ों के साइज़ से
और तभी ईमानदार को गलत होने का आभास होता है ।
तेज
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