यादें

बेवजह, बेसबब सी खुशी जाने क्यों थीं?
चुपके से यादें मेरे दिल में समायीं थीं,
अकेले नहीं, काफ़िला संग लाईं थीं,
मेरे साथ दोस्ती निभाने जो आईं थीं।

दबे पाँव गुपचुप, न आहट ही की कोई,
कनखियों से देखा, फिर नज़रें मिलाईं थीं।
मेरा काम रोका, हर उलझन को टोका,
मेरे साथ वक्त बिताने जो आईं थीं।

भूले हुए किस्से, कुछ टुकड़े, कुछ हिस्से
यहाँ से, वहाँ से बटोर के ले आईं थीं।
हल्की सी मुस्कान को हँसी में बदल गईं
मेरे साथ ठहाके लगाने जो आईं थीं।

वो बातों का कारवाँ चला तो थमा नहीं;
गुज़रे कल को आज से मिलाने जो आईं थीं।
बेटी से माँ तक के लम्बे सफ़र में
छोटी छोटी दूरियाँ इन्होंनें मिटाईं थीं।

Comments

9 responses to “यादें”

    1. Abhilasha Shrivastava Avatar
      Abhilasha Shrivastava

      Thank you for the appreciation

  1. Kanchan Dwivedi

    Nice

  2. Satish Pandey

    Nice

  3. Abhishek kumar

    👌

  4. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    बहुत सुंदर

  5. Pragya Shukla

    यादों पर बहुत ही सुंदर बात कही है आपने यादें ऐसी ही होती हैं

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