उठ तू शहर से पर गांव को याद रख,
पहुँच आसमां से ऊपर पर जमीं को याद रख,
बेशक मिले होंगे यार हजार पर ,
जर्रे ए जिगर में इस दुश्मन को याद रख।
अगर लाना है अपनी डाल पर फल ए बहार,
तो अपनी टहनियों में लचक बरक़रार रख…
याद रख
Comments
2 responses to “याद रख”
-

बहुत खुब
-

Good
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.