यार इसमें तो मज़ा है ही नहीं, यार इसमें तो मज़ा है ही नहीं,
कोई हमसे ख़फ़ा है ही नहीं,
इश्क है मर्ज़ है इसकी कोई भी दवा है ही नहीं।।।
राही (अंजाना)
यार इसमें तो मज़ा है ही नहीं
Comments
3 responses to “यार इसमें तो मज़ा है ही नहीं”
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nice.. please review my poem also
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Thank you
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Osm
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