ये किनारे दूर होते गए ,
सिर्फ शकों के सैलाब से।।
ये किनारे
Comments
11 responses to “ये किनारे”
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,सुंदर
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Thank you sir
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वाह
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धन्यवाद जी
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दीये की लौ बुझती रही,
सिर्फ़ नफ़रत ए हवा से-

Very nice, thank you
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thanks
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बहुत उम्दा
रिश्तो में विश्वास का होना बहुत जरूरी है अगर शक नाम की दीवार बीच में आ जाएं तो रिश्ता ज्यादा दिन नहीं चलता।
सुन्दर भाव -

बहुत बहुत-बहुत धन्यवाद
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अतिसुंदर
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धन्यवाद
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