ये दिल…

ये दिल…
वही क्यूॅं माॅंगता है!!
जो अक्सर मिल ना पाए,
लब वही क्यूॅं कहना चाहें!!
जो अक्सर हम कह ना पाएं।
काश!!
दिल ही न होता,
तो ये दर्द भी ना होता।
हम दर्द न मिले कोई दर्द में,
जान भी माॅंगेंगे वो..
तो जान भी दे देंगे हम,
जानते हैं हम उनको..
पिछले जन्म से॥
______✍गीता

Comments

6 responses to “ये दिल…”

  1. This comment is currently unavailable

    1. बहुत-बहुत धन्यवाद विवेक भाई

    1. सादर धन्यवाद भाई जी🙏

  2. वाह सुंदर भाव

    1. धन्यवाद प्रज्ञा जी

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