रंग बिरंगे सपने

रंग बिरंगे सपने

नव गीत नव सृजन को
मैं गुनगुनाना चाहता हूँ
आसमान की ऊँचाई को
मैं नापना चाहता हूँ
हौसले की उड़ान से
सब कुछ बदलना चाहता हूँ
रंग बिरंगे सपनो को
मैं अपना बनाना चाहता हूँ
नभ अम्बर की गलीयों में
प्यार लुटाना चाहता हूँ
मनुष्य के जीवन को
प्यार सिखाना चाहता हूँ
चिड़िया कि चहचहाहट में
एक सृजन लिखना चाहता हूँ
फिर से सपने में खो कर मैं
स्वच्छ सुन्दर संसार चाहता हूँ

महेश गुप्ता जौनपुरी

Comments

One response to “रंग बिरंगे सपने”

  1. राम नरेशपुरवाला

    Good

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