रद्दी है सरकार
बदल डालो तुम इसको
सिस्टम है लंगड़ा
पकड़ा लाठी दो उसको
विकलांग हो गई सोंच
सोंच को बदलो अपनी
वोट की खातिर तुम
जान जोखिम में ना डालो अपनी
क्या हो गया भला
तुम्हारा इन नेताओं से
घर में रहो सुरक्षित
बहिष्कृत करो इन्हें जग से
कोरोना हो गया तो क्या
तुम जी पाओगे ?
नेता होंगे विजयी भला तुम क्या पाओगे ????
रद्दी है सरकार…..
Comments
6 responses to “रद्दी है सरकार…..”
-

सुंदर अभिव्यक्ति
-

Thanks
-
-
अतिसुंदर रचना
-

धन्यवाद
-
-

आपकी कविता अति उत्तम है। सच्चाई के जीता जागता आईना है।
-

बहुत-बहुत धन्यवाद
-
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.