तुमने राख मली तन में
वैरागी जीवन अपनाया
ईश रखा मन में।
धरम ध्वजा लहराई गाया
खूब फिरे जग में।
माया-मोह किनारे फेंका
राख मली तन में।
कुछ भी कहे जमाना तुमसे
त्याग किया तुमने।
एक बार मिला था जीवन
त्याग किया तुमने।
कमी नहीं खोजे अवलेखा
भजन किया तुमने।
राख मली तन में
Comments
2 responses to “राख मली तन में”
-
बहुत सुंदर रचना
-
बहुत बहुत धन्यवाद
-
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.