राज गोरखपुरी

माँ के दिल में बसर नहीं छोड़ा.
बाकी कोई कसार नहीं छोड़ा.
घर की मजबूरियों ने भेजा है,
हमनें यूँ ही शहर नहीं छोड़ा.

—–डॉ.मुकेश कुमार (राज गोरखपुरी)
www.facebook.com/drmkraj2010

Comments

3 responses to “राज गोरखपुरी”

  1. " पंकजोम " प्रेम "" Avatar
    ” पंकजोम ” प्रेम “”

    Wahhhhhhh jnab….लाज़वाब

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