रात का बटोही भटकता फिरे,
और नींद समुद्री लहरों-सी,
किनारे को छुकर वापिस चली जाएं।
रात का बटोही
Comments
12 responses to “रात का बटोही”
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बहुत उम्दा
आजकल हमारे साथ भी ऐसा ही हो रहा है-

सुन्दर
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धन्यवाद सुमन जी
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धन्यवाद मानुष सर
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बहुत खूब
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धन्यवाद सर
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बहुत ख़ूब
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धन्यवाद जी
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Bahut khub
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Thank you so much
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बहुत उम्दा
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धन्यवाद सर
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