रात का बटोही

रात का बटोही भटकता फिरे,
और नींद समुद्री लहरों-सी,
किनारे को छुकर वापिस चली जाएं।

Comments

12 responses to “रात का बटोही”

  1. मोहन सिंह मानुष Avatar

    बहुत उम्दा
    आजकल हमारे साथ भी ऐसा ही हो रहा है

      1. धन्यवाद सुमन जी

    1. धन्यवाद मानुष सर

  2. Geeta kumari

    बहुत ख़ूब

  3. Deep Patel

    Bahut khub

  4. बहुत उम्दा

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