रात के उजाले…!!!

नींदों की सरगोशी और
रात के उजाले
यही तो हैं मेरे जीवन के साथी
मेरे एकाकीपन के सहारे
जिनकी संगत में
जिंदगी का एक-एक दिन कट जाता है
जैसे आसमान के आगोश में चांद आराम पाता है
सितारों की झिलमिल चादर को ओढ़कर सोती हूं
सुबह सूरज की किरणों से अपना मुंह धोती हूं।।

Comments

3 responses to “रात के उजाले…!!!”

  1. राकेश पाठक

    Good

    1. धन्यवाद 

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