रुके कदम….

एक बार रुके कदम फिर चलने लगे
उनकी रूह की आग में हम पिघलने लगे
हाथ अगर होता उनका मेरे हाथ में
तो जहान सारा बदल देता
लेकिन अकेले ही गिरके हम समलने लगे
एक बार रुके कदम फिर चलने लगे ……..!!!

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2 responses to “रुके कदम….”

    1. Ravi Bohra Avatar
      Ravi Bohra

      Dhanyawad sirji

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