रुख़्सत कुछ इस तरह हो गए

रुख़्सत कुछ इस तरह हो गए
वो जिंदगी से मेरी,

मानो बिन मौसम की बरसात
झट से गिरकर तेज़ धूप सी खिला जाती हो,

कम्बख़त मुझे थोड़ा तो भींग लेने देते
कुछ देर उसके जाने के बाद
उसके होने का एहसास तो कर लेता।।

-मनीष

Comments

5 responses to “रुख़्सत कुछ इस तरह हो गए”

  1. महेश गुप्ता जौनपुरी Avatar
    महेश गुप्ता जौनपुरी

    वाह

  2. महेश गुप्ता जौनपुरी Avatar
    महेश गुप्ता जौनपुरी

    वाह बहुत सुंदर

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