लाल चौक बुला रहा हमें, तिरंगा फहराने को

सिहासन के बीमारों ,कविता की ललकार सुनो।
छप्पन ऊंची सीना का उतर गया बुखार सुनो।
कश्मीर में पीडीपी के संग गठजोड किये बैठे हैं।
राष्ट्रवाद के नायक पत्थरबाजी पर मुक कैसे हैं॥
क्यूं चलकर नहीं जा रहे अब कश्मीर बचाने को।
लाल चौक बुला रहा तुम्हें,तिरंगा फहराने को॥

 

भारत माँ जगा रही है एक सौ पच्चीस करोड़ बेटों को।
रण क्षेत्र में बुद्ध भी चलेंगे , लेकर अपने उपदेशों को।
जिन्हें ज्ञान चाहिए उनको, आगे बढ़कर सम्मान दो।
हूरों की जिन्हें चाह है उन्हें, सीधा कब्रिस्तान दो॥
भरतपुत्रों घर से निकलो तुम,दहशतगर्दी दफनाने को॥
लाल चौक बुला रहा तुम्हें, तिरंगा फहराने को॥

 

बर्मा काबुल कंधार कॆ जैसे कश्मीर नहीं हम खोनेवाले।
अमरीका के चौखट पर जाकर और नहीं हम रोनेवाले।।
भारत को अमरीका का बाजार बनाना बंद करो।
पाकिस्तान जैसे देश को यार बताना बंद करो॥
अब तो गूंगा कर तुम मित्रता के अफसाने को।
लाल चौक बुला रहा तुम्हें तिरंगा फहराने को॥

 

 

आतंकवादी देश कहना होगा , पाकिस्तान को।
देख लिया है हमने नवाज शरीफ के ईमान को।।
नवाज के घर जाकर जब जब खुशी मनाते हैं।
तब-तब पीठ के पीछे खंजर हम अक्सर खाते है।।
फिर भी आतुर व्याकुल क्यूं है हम, हाथ मिलाने को।
लाल चौक बुला रहा तुम्हें तिरंगा फहराने को॥

 

 

राजनीतिक पार्टियों के,कैसे बनते हम गुलाम हैं।
राम से लेकर शिवाजी तक मेरा भारत महान है।।
नेता आज हैं कल नहीं रहेंगे, इस बात में सच्चाई है।
भारत भुमि के दम से, सदियों से जग में रौशनाई है॥
अजर अमर है देश हमारा, निकल चलो ये गाने को।
लाल चौक बुला रहा तुम्हें, तिरंगा फहराने को॥

 

 

ये भी गजब संस्कृति है पत्थर पर भी प्यार पले।।
महबूबा तुमको प्यारी है और सेना पर एफआईआर चले।
कोई भी ऐरा-गैरा कैसे कुछ भी कह जाता है।
इस पर हिन्दुस्ताँ की सहनशीलता वो सब सह जाता है
देश की जनता हिम्मत कर ले नेताओ से टकराने को।
लाल चौक बुला रहा है तुम्हें, तिरंगा फहराने को॥

 

श्यामा प्रसाद के सपने सोये हैं कश्मीर की वादी में।
कुछ तो बोलो राष्ट्र नायक, घाटी की बरबादी में॥
आखिर पूर्वजों को कोश कोश के कब रोनेवाले हैं।
इतिहास हमें भी कह देगा कि ये भी सोनेवाले है॥
याद कर लो पल भर लाल कृष्ण के जमाने को।
लाल चौक बुला रहा तुम्हें, तिरंगा फहराने को॥

 

माना हमारी मजबूरी है रोटी कपड़ा और मकान।
चिंता दे देती है हर रोज, नौकरी और दुकान।।
बस दो दिन अपना दे दो तुम, मातृभूमि के उपकारों को।
चलो सबक सिखाकर आते हैं कश्मीर के गद्दारों को।
फिर हिम्मत ना कर पाये कोई सेना से टकराने को।
लाल चौक बुला रहा है हमें, तिरंगा फहराने को।

ओमप्रकाश अवसर

पाटन दुर्ग छत्तीसगढ़

7693919758 

Comments

3 responses to “लाल चौक बुला रहा हमें, तिरंगा फहराने को”

  1. Abhishek kumar

    बेहतरीन सृजन

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