मन के भाव लिखा करती हूँ,
ज़िन्दगी की धूप और छाॅंव लिखा करती हूँ।
कभी “खुशियाँ” तो कभी,
“घाव” लिखा करती हूँ।
आभार आपका आप इसे कविता कहते हैं,
मैं तो बस जज़्बात लिखा करती हूँ।
कभी दुनियाँ के, कभी निज-हालात
लिखा करती हूँ॥
_______✍गीता
लेखन
Comments
8 responses to “लेखन”
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Nice line
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Thanks
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वाह, लाजवाब सृजन
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बहुत बहुत धन्यवाद सतीश जी
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बेहद खूबसूरत अभिव्यक्ति दीदी मां*🙏 💐💐
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धन्यवाद एकता
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बहुत खूब
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बहुत बहुत धन्यवाद भाई जी
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