ले खुशी के रंग सबको, रंग देना सीखिये,
रंग उनका रंग अपना, मिल सके यह कीजिये।
रंग मन में रंग तन में, रंग जीवन सींचिये,
बेरंग जीवन जूझते , रंग उनको दीजिये।
दर्द में डूबे हुये को, कुछ सहारा कीजिये,
नफरतों को त्यागकर तुम, प्रेमरस को पीजिये।
दूर कोई जा न पाये, पास सबको खींचिये,
नेह रंगों से सभी की, वाटिका को सींचिये।
ले खुशी के रंग(गीतिका छन्द)
Comments
8 responses to “ले खुशी के रंग(गीतिका छन्द)”
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अति उत्तम रचना
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सुंदर सतीश जी
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“नेह रंगों से सभी की, वाटिका को सींचिये।”
लाजबाव
रंगो के उत्सव को आमंत्रण देती मधुरतम कविता। -

बहुत खूब
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ले खुशी के रंग सबको, रंग देना सीखिये,
रंग उनका रंग अपना, मिल सके यह कीजिये।
________लाजवाब अभिव्यक्ति, रंगो के सुन्दर पर्व पर कवि सतीश जी की अति उत्तम रचना -
अतिसुंदर भाव
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बहुत खूब , लाजवाब
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ले खुशी के रंग सबको, रंग देना सीखिये,
रंग उनका रंग अपना, मिल सके यह कीजिये।
रंग मन में रंग तन में, रंग जीवन सींचिये,
बेरंग जीवन जूझते , रंग उनको दीजिये।होली के त्योहार पर उत्तम कविता
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