लोकतन्त्र

जहर मत फैलाओ यहां, नेवले और बाज हैं
गुस्ताखी माफ नहीं होती वहां, जहां लोकतन्त्र का राज है

Comments

3 responses to “लोकतन्त्र”

  1. Geeta kumari

    बहुत सुंदर पंक्तियां

  2. अति उत्तम

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