वतन मे खिले

नीचता ऊ़चता देखते हम चले
आइए भूल जाए न सिक्वे गिले
एक जैसा सदा भाव लेकर चले
फूल जैसा बगीचा वतन. मे खिले

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3 responses to “वतन मे खिले”

  1. सुंदर पंक्तियाँ

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