वरना कौन अपनी नाव देता है………………

पत्ता-पत्ता हिसाब लेता है

तब कहीं पेड़ छांव देता है।

भीड़ में शहर की न खो जाना
ये दुआ सबका गांव देता है।

हम भी तो डूबने ही निकले थे
वरना कौन अपनी नाव देता है।

किसी उंगली में जख्म देकर ही
कोई कांटा गुलाब देता है।

जहां बिकेगा बेच देंगे ईमां
कौन मुहमांगा भाव देता है।

जान देने का हौंसला हो अगर
फिर समंदर भी राह देता है।

जिंदगी दे के ले के आया हूं
कौन यूं ही शराब देता है।

प्यार खिलता है बाद में जाकर
पहले तो गहरा घाव देता है।
~~~~~~~~~~~~~~–सतीश कसेरा

Comments

5 responses to “वरना कौन अपनी नाव देता है………………”

  1. Mohit Sharma Avatar
    Mohit Sharma

    कहो न कहो मोहब्बत की बातें
    एक न एक दिन जमाना जान (knew and life) लेता है

    1. Panna Avatar

      जानकर भी अनजान बनते है लोग इस दुनिया में
      अनजानो के शहर में इन्सान अपनी जान देता है

      1. satish Kasera Avatar
        satish Kasera

        Thanks Panna

    2. satish Kasera Avatar
      satish Kasera

      Thanks Mohit

  2. राम नरेशपुरवाला

    Good

Leave a Reply

New Report

Close